गुरुवार, नव 21

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ली जंग हो

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प्रो. ली जंग हो का जन्म जून 1948 में हुआ था। हिंदी के अंतरराष्ट्रीय पटल पर सन 1981 से निरंतर सक्रिय प्रो. ली जंग हो एक ऐसे समर्पित हिंदी शिक्षक का नाम है, जिन्होंने कोरिया में पहली बार हिंदी की ज़मीन तैयार करने का ऐतिहासिक कार्य किया।

कार्यक्षेत्र

वर्तमान में हंकुक यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ॉरेन स्टडीज़ के हिंदी विभाग में प्रोफ़ेसर-विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत प्रो. हो ने कोरिया में हिंदी के प्रचार-प्रसार की हर चुनौती को पूरी रचनात्मक निष्ठा के साथ स्वीकार किया और कोरियाई छात्रों के लिए हिंदी व्याकरण, कोश, वार्तालाप और साहित्य संबंधी आठ पुस्तकों के अलावा भारतीय लोक कथाओं और बाल कहानियों के अनूदित संकलन तैयार किए। भीष्म साहनी के सुप्रसिद्ध उपन्यास ‘तमस’ का कोरियाई अनुवाद और कोरियाई-हिंदी शब्दकोश का निर्माण आपकी विशिष्ट उपलब्धि के रूप में उल्लेखनीय है।
अपने व्यक्तित्व और कृतित्व में महात्मा गाँधी के कर्मठ आत्मानुशासन और लोकोपयोगी रचनात्मकता की गहराई से प्रभावित प्रो. हो ने महात्मा गाँधी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित एक दर्जन से भी अधिक शोध आलेखों की रचना की है।

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सम्मान और पुरस्कार

सन 1996 में ट्रिनिडाड और टुबैगो में आयोजित पाँचवें विश्व हिंदी सम्मेलन में हिंदी के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार में अमूल्य योगदान के लिए आपको सम्मानित किया गया। हिंदी के अध्ययन-अध्यापन में पिछले 30 वर्ष से निरंतर विनम्र भाव से संलग्न वरिष्ठ विद्वान प्रो. ली जंग हो के महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 'डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार' से सम्मानित करते हुए केंद्रीय हिंदी संस्थान गौरवान्वित है।