रविवार, अग 18

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विजय बहादुर सिंह

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विजय बहादुर सिंह का जन्म फ़रवरी, 1940 ई. में हुआ था। आधुनिक हिंदी के विकास में अपनी सृजनात्मक आलोचना से उल्लेखनीय योगदान देने वाले लेखकों में डॉ. विजय बहादुर सिंह का नाम अग्रगण्य है। नियमित लेखन के साथ विजय बहादुर सिंह दीर्घ अवधि से शोध और अध्यापन कार्य से भी जुड़े रहे हैं। लेकिन मुख्यत: एक साहित्य लोचक के रूप में विख्यात डॉ. विजय बहादुर सिंह ने आधुनिक हिंदी कविता और कवियों की सृजनात्मक उपलब्धियों के साथ-साथ हिंदी कथा और उपन्यास साहित्य पर भी अपनी आलोचना प्रस्तुत की है।

रचनाएँ

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डॉ. सिंह ने आठ खंडों में भवानी प्रसाद मिश्र रचनावली, चार खंडों में दुष्यंत कुमार रचनावली और आठ खंडों में नंददुलारे वाजपेयी रचनावली का निर्दोष और चर्चित संपादन किया। उन्होंने 'आलोचक का स्वदेश' नाम से नंददुलारे वाजपेयी की साहित्यिक जीवनी भी लिखी। 'वृहत्‍त्रयी', 'नागार्जुन का रचना-संसार', 'नागार्जुन संवाद', 'कविता और संवेदना', 'महादेवी के काव्य का नेपथ्य' आदि उनकी प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ हैं।

पुरस्कार व सम्मान

विजय बहादुर सिंह को उनके कृतित्व के लिए 'रामविलास शर्मा सम्मान', 'लोक सम्मान', 'श्रेष्ठ कला आचार्य और कौमी एकता सम्मान' से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. सिंह को उनके सृजनात्मक अवदान के लिए 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने 'सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार' से सम्मानित किया है।