बुधवार, अक्टू 16

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श्याम बेनेगल

श्याम बेनेगल भारत के जाने-माने और हिंदी सिनेमा के अग्रणी फ़िल्म निर्देशकों में से एक हैं। वे किसी के पीछे चलने वाले निर्देशकों में से नहीं हैं। अपने समय से संघर्ष करने वाले श्याम बेनेगल की हर फ़िल्म ने एक नया मुहावरा गढ़ा है। उनकी हर फ़िल्म का अपना एक अलग अन्दाज़ होता है। ऋषिकेश मुखर्जी से श्याम बेनेगल की तुलना नहीं की जा सकती, किंतु उनकी हास्य फ़िल्मों ने भारतीय सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनकी हास्य फ़िल्में न केवल गुदगुदाती हैं, अपितु सामाजिक सन्देश भी लोगों तक पहुँचाती हैं।

Shyam Benegal

सार्थक फ़िल्मकार

श्याम बेनेगल का जन्म 14 दिसम्बर, 1934 को हैदराबाद, आन्ध्र प्रदेश में हुआ था। मुख्यधारा से अलग भारत में हिन्दी सिनेमा के एक अग्रणी फ़िल्म निर्देशक के रूप में उन्होंने काफ़ी नाम कमाया है। सार्थक सिनेमा के प्रति प्रतिबद्ध फ़िल्मकार श्याम बेनेगल अपनी श्रेणी के किसी भी फ़िल्मकार की तुलना में अधिक सक्रिय रहे हैं। देश के अग्रणी फ़िल्म निर्माता और बेहतरीन सृजनशील लेखक एवं निर्देशक श्री श्याम बेनेगल ने 1200 से भी अधिक फ़िल्मों का सफल निर्देशन किया है। इनमें विज्ञापन, व्यावसायिक, डॉक्यूमेंटरी, वृतचित्र एवं टेली फ़िल्में आदि भी सम्मिलित हैं।

फ़िल्म निर्माण

श्री बेनेगल 1980-1983 एवं 1989-1992 की अवधि में भारतीय फ़िल्म एवं टेलीविजन इंस्टीट्यूट, पुणे के अध्यक्ष भी रहे थे। फ़रवरी, 2006 में वे राज्य सभा के सक्रिय सदस्य के रूप में भी नामित किये गए थे। अंकुर, चरणदास चोर (बाल फ़िल्म), निशांत, मंथन, सुभाषचंद्र बोस, भूमिका, अनुग्रहम (तेलुगु फ़िल्म), जुनून, कलयुग, आरोहण, मंडी, निकाल, भारत एक खोज (पं. जवाहर लाल नेहरू की 'डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया' पर आधारित 53 भागों में टी.वी. सीरियल) सूरज का सातवाँ घोड़ा, अंतर्नाद, अमरावती की कथाएँ (दूरदर्शन के लिए 13 टेली लघु कथा फ़िल्में और सरदारी बेगम आदि फ़िल्मों ने श्याम बेनेगल को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक नई पहचान दी है और बुलन्दियों की ऊँचाइयों पर पहुँचाया है।

विदेश यात्राएँ

सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्रिया-कलापों से भी अखिल भारतीय स्तर पर श्याम बेनेगल सघन रूप से संबद्ध रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने यूरोप, दक्षिणी अफ़्रीका, चीन, रूस, अमरीका, मलेशिया, वियतनाम, म्यांमार और दक्षिण एशियाई देशों की अनेकों बार यात्राएँ की हैं।

Shyam-benegal

पुरस्कार एवं सम्मान

श्याम बेनेगल को 1976 में 'पद्मश्री' और 1961 में 'पद्मभूषण' से सम्मानित किया गया था। हिन्दी फ़िल्मों में उनके विशिष्ट योगदान को देखते हुए 2007 में उन्हें भारतीय सिनेमा के श्रेष्ठ पुरस्कार 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' से भी सम्मानित किया गया, जिसके वे सच्चे अर्थों में हकदार थे। अपनी श्रेष्ठ हिन्दी फ़िल्मों के लिये श्याम बेनेगल ने पाँच बार 'राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार' जीता है। ये कारनामा करने वाले वह एकमात्र हिन्दी फ़िल्म निर्देशक हैं। भारत सरकार ने 1991 में कला के क्षेत्र में उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए उन्हें 'पद्मभूषण' देकर सम्मानित किया था। 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' श्याम बेनेगल को 'गंगाशरण सिंह पुरस्कार' से सम्मानित करते हुए गौरवान्वित महसूस कर रहा है।