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सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार वर्ष 2008-09

वर्ष 2008 के सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार से सम्मानित विद्वान
1. डॉ. नंदकिशोर आचार्य nand-kishore-acharya
2. डॉ. विजय बहादुर सिंह vijay-bahadur-singh
वर्ष 2009 के सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार से सम्मानित विद्वान
1. श्री अजित कुमार ajit-kumar
2. श्री गोपाल चतुर्वेदी gopal-chaturvedi


 

गोपाल चतुर्वेदी

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गोपाल चतुर्वेदी का जन्म अगस्त, 1942 ई. में हुआ था। व्यंग्य को व्यवस्थागत विसंगतियों पर चोट करने का कारगर हथियार बनाकर संघर्ष करने की विरल लेखकीय पंरपरा में श्री गोपाल चतुर्वेदी का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। अपनी हास्य-व्यंग्यपरक कृतियों के माध्यम से श्री चतुर्वेदी जहाँ एक तरफ़ जड़ हो चुके मूल्यों की शिनाख्त करते हैं, वहीं दूसरी तरफ़ उन्हीं उपकरणों से उस जड़ता को भंग कर विवेकशील चेतना के अविरल प्रवाह का मार्ग प्रशस्त करते हैं।


लेखन कार्य

श्री चतुर्वेदी ने भारत सरकार के अनेक महत्वपूर्ण मंत्रालयों में उच्च पदों पर कार्य करते हुए समानांतर रूप से अपने लेखकीय दायित्वों का पूर्ण समर्पण के साथ निर्वहन किया है। उन्होंने 'सारिका', 'इंडिया टुडे', 'नवभारत टाइम्स', 'हिंदुस्तान', 'दैनिक भास्कर' और 'साहित्य अमृत' जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में अनेक वर्षों तक नियमित स्तंभ लेखन कर अपनी लेखकीय सक्रियता को जीवंत रखा है।

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व्यंग्य संग्रह

अपनी व्यंग्य रचनाओं के लिए गोपाल चतुर्वेदी प्रसिद्ध हैं। उनके कुछ व्यंग्य संग्रह इस प्रकार हैं-

  • अफ़सर की मौत
  • दुम की वापसी
  • राम झरोखे बैठ के
  • फ़ाइल पढ़ी

पुरस्कार

अनेक विशिष्ट पुरस्कारों से सम्मानित श्री गोपाल चतुर्वेदी जैसे कृती व्यक्तित्व को 'सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार' से सम्मानित करके 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने गर्व की अनुभूति की है।

विजय बहादुर सिंह

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विजय बहादुर सिंह का जन्म फ़रवरी, 1940 ई. में हुआ था। आधुनिक हिंदी के विकास में अपनी सृजनात्मक आलोचना से उल्लेखनीय योगदान देने वाले लेखकों में डॉ. विजय बहादुर सिंह का नाम अग्रगण्य है। नियमित लेखन के साथ विजय बहादुर सिंह दीर्घ अवधि से शोध और अध्यापन कार्य से भी जुड़े रहे हैं। लेकिन मुख्यत: एक साहित्य लोचक के रूप में विख्यात डॉ. विजय बहादुर सिंह ने आधुनिक हिंदी कविता और कवियों की सृजनात्मक उपलब्धियों के साथ-साथ हिंदी कथा और उपन्यास साहित्य पर भी अपनी आलोचना प्रस्तुत की है।

रचनाएँ

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डॉ. सिंह ने आठ खंडों में भवानी प्रसाद मिश्र रचनावली, चार खंडों में दुष्यंत कुमार रचनावली और आठ खंडों में नंददुलारे वाजपेयी रचनावली का निर्दोष और चर्चित संपादन किया। उन्होंने 'आलोचक का स्वदेश' नाम से नंददुलारे वाजपेयी की साहित्यिक जीवनी भी लिखी। 'वृहत्‍त्रयी', 'नागार्जुन का रचना-संसार', 'नागार्जुन संवाद', 'कविता और संवेदना', 'महादेवी के काव्य का नेपथ्य' आदि उनकी प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ हैं।

पुरस्कार व सम्मान

विजय बहादुर सिंह को उनके कृतित्व के लिए 'रामविलास शर्मा सम्मान', 'लोक सम्मान', 'श्रेष्ठ कला आचार्य और कौमी एकता सम्मान' से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. सिंह को उनके सृजनात्मक अवदान के लिए 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने 'सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार' से सम्मानित किया है।

 

अजित कुमार

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अजित कुमार हिंदी के वरिष्ठ कवियों में से एक हैं। इनका जन्म 1933 ई. में हुआ था। मौलिक लेखन और अध्‍यापन के साथ-साथ अनुवाद और संपादन आदि कार्यों से भी अजित कुमार सजग दायित्वबोध के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। उनका मौलिक लेखन विविध विधाओं को अपने परिसर में शामिल करता है।

पुस्तकें

अनेक कविता संग्रहों के अलावा अजित कुमार की अब तक कहानी, उपन्यास, यात्रा, संस्मरण, आलोचना आदि विधाओं में लगभग दो दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में दीर्घ अवधि से नियमित लेखन के अलावा रेडियो, टेलीविजन और साहित्यिक कार्यक्रमों में उनकी प्रचुर भागीदारी ने एक सक्रिय और सजग लेखक के रूप में उन्हें स्थापित कर दिया है। अजित कुमार की कुछ प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित हैं-

  • अकेले कंठ की पुकार
  • कविता का जीवित संसार
  • इधर की हिंदी कविता
  • ऊसर
  • घरौंदा
  • अ से ऊ तक

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पुरस्कार

अजित कुमार की अनेक रचनाओं का देशी-विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है तथा अनेक प्रतिष्ठाओं ने उनके कृतित्व के लिए उन्हें सम्मानित भी किया है। श्री अजित कुमार को 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने अपार हर्ष के साथ 'सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार' से पुरस्कृत किया है।

 

नंदकिशोर आचार्य

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नंदकिशोर आचार्य का जन्म अगस्त, 1945 ई. में हुआ था। उन्हें आज के समय के सर्वाधिक रचनात्मक लेखकों में से एक माना जाता है। उनका रचनात्मक वैविध्य हमें चकित करता है। चाहे कविता हो, नाटक हो, आलोचना हो, शिक्षा-सभ्य‍ता-संस्कृति के प्रश्न हों, अनुवाद का व्यापक फलक हो या फिर संपादन आदि से संबंधित उपलब्धियाँ, सब दिशाओं में नंदकिशोर आचार्य की सजग-सक्रिय प्रतिभा और चेतना का प्रसार उल्लेखनीय और प्रशंसनीय है।

रचनाएँ

अज्ञेय द्वारा संपादित 'चौथा सप्तक' के कवि डॉ. नंदकिशोर आचार्य मूलत: कवि हैं। उनकी कविताओं से उनके लोक और समाज-सांस्कृतिक परिवेश की अनुगूँजें ध्वनित होती हैं। बारह संग्रहों में संगृहीत उनकी अनेक कविताएँ दूसरी भाषाओं में भी अनूदित हो चुकी हैं। 'अज्ञेय की काव्य तितीर्षा', 'साहित्य का अध्यात्म', 'लेखक की साहित्यिकी', 'सभ्यता का विकल्प', 'शिक्षा का सत्यांग्रह' और 'संस्कृति की सामाजिकी' उनकी कुछ प्रमुख आलोचना पुस्तकें हैं। इनके अलावा ब्राडस्की, लोर्का और आधुनिक अरबी कविताओं सहित अनेकों दूसरी भाषाओं की श्रेष्ठ कविताओं के उन्होंने बेहद सुंदर अनुवाद प्रस्तुत किए हैं।

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पुरस्कार व सम्मान

नंदकिशोर आचार्य को 'मीरा पुरस्कार', 'बिहारी पुरस्कार', 'भुवनेश्वर पुरस्कार', 'राजस्थान संगीत नाटक अकादमी अवार्ड' जैसे कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। ऐसे साहित्य मनीषी को 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने 'सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार' से सम्मा‍नित किया है और असीम हर्ष की अनुभूति कर रहा है।