बुधवार, अक्टू 16

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अनिल कुमार चतुर्वेदी

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स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा के क्षेत्र में हिंदी में विशिष्‍ट लेखन करने वाले लेखकों में डॉ. अनिल कुमार चतुर्वेदी का नाम अग्रणी है। डॉ. अनिल कुमार चतुर्वेदी का जन्म 4 जनवरी, 1945 को हुआ।

कार्यक्षेत्र

वरिष्‍ठ चिकित्‍सा परामर्शदाता के रूप में कार्यरत डॉ. चतुर्वेदी ने हिंदी में स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा संबंध लेखन को नए और उपयोगी आयाम दिए हैं। ‘चिकित्‍सा एवं हम’, ‘फैमिली हेल्‍थ गाइड’, ‘मधुमेह’, ‘वजन घटाने के 101 टिप्‍स’, इनकी चर्चित पुस्‍तकें हैं। इनके 500 से अधिक लेख देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
पत्रिकाओं में नियमित स्‍तंभ लेखन के साथ ये आकाशवाणी, दूरदर्शन और बी.बी.सी. लंदन की स्‍वास्‍थ्‍य परिचर्चाओं में भी सहभागिता करते हैं।

सम्मान एवं पुरस्कार

डॉ. चतुर्वेदी को उत्‍कृष्‍ट लेखन के लिए उ.प्र. हिंदी संस्‍थान के विज्ञान भूषण सम्‍मान, हिंदी अकादेमी,‍ दिल्‍ली के साहित्यिक कृति सम्‍मान, हिंदी साहित्‍य सम्‍मेलन, दिल्‍ली के हिंदी सेवा सम्‍मान सहित अनेक पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया जा चुका है। स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा से जुड़े विषयों को जनभाषा में जन-जन तक पहुँचाने वाले डॉ. चतुर्वेदी को आत्‍माराम पुरस्‍कार से सम्‍मानित करते हुए केंद्रीय हिंदी संस्‍थान हर्ष का अनुभव कर रहा है।

संपर्क      

ए-3/305, एकता गार्डन, पटपड़गंज, दिल्‍ली-1110092

फोन  –    09122721471, 09810045277
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काली शंकर

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में वरिष्‍ठ वैज्ञानिक रहे श्री काली शंकर ने भारत में संपन्‍न विभिन्‍न उपग्रह संचार परियोजनाओं एवं उपग्रह संचार प्रणाली के अनेक तंत्रों और उपतंत्रों के डिजाइन और विकास कार्यों में महत्‍वपूर्ण भागीदारी की है। श्री काली शंकर का जन्म 20 जुलाई, 1945 को हुआ।

कार्यक्षेत्र

अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष अन्‍वेषण के क्षेत्र में सक्रिय योगदान करने वाले श्री कालीशंकर वैज्ञानिक एवं तकनीकी साहित्‍य और उपकरण विकास के क्षेत्र में भी विशिष्‍ट योगदान है। इन्‍होंने हिंदी में बड़ी मात्रा में इस विषय पर लेखन कार्य कर हिंदी के एक बड़े अभाव की पूर्ति की है।  श्री काली शंकर एक हजार से अधिक आलेख विभिन्‍न राष्‍ट्रीय अंतर्राष्‍ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। ‘अंतरिक्ष में विज्ञान’, ‘अंतरिक्ष अन्‍वेषण का स्‍वर्ण युग’, अंतरिक्ष में जीवन’, ‘ब्रह्माण्‍ड और टेलीस्‍कोप’ आदि इनकी चर्चित पुस्‍तकें हैं।

सम्मान एवं पुरस्कार

श्री काली शंकर को उनके योगदान के लिए डॉ. मेघनाद साहा एवार्ड, राजीव गांधी राष्‍ट्रीय ज्ञान विज्ञान एवार्ड, इंदिरा गांधी राजभाषा एवार्ड जैसे अनेक पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया जा चुका है।
ऐसे समर्पित वैज्ञानिक एवं हिंदी सेवी विद्वान को आत्‍माराम पुरस्‍कार से पुरस्‍कृत करते हुए केंद्रीय हिंदी संस्‍थान गर्व की अनुभूति कर रहा है।

संपर्क      

के-1058, आशियाना कॉलोनी, कानपुर रोड, लखनऊ-226012 (उ.प्र.)

फोन  –  09935793961
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विजय कुमार मल्‍होत्रा

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श्री विजय कुमार मल्‍होत्रा का नाम माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के हिंदी रूपांतरण की रूपरेखा विकसित करने वाले तकनीकीविद के रूप में जाना जाता है। श्री विजय कुमार मल्‍होत्रा का जन्म 28 अगस्त, 1946 को हुआ।

कार्यक्षेत्र

आपने अनुप्रयुक्‍त भाषा‍विज्ञान, प्राकृतिक भाषा संसाधन, कंप्‍यूटरी भाषाविज्ञान और मशीनी अनुवाद के क्षेत्रों में उल्‍लेखनीय योगदान दिया है। इससे पहले श्री मल्‍होत्रा ने राजभाषा विभाग, रेल मंत्रालय में निदेशक(राजभाषा) के रूप में वर्षों तक हिंदी की सेवा की है। श्री मल्‍होत्रा यू.के. और अमरीका के विश्‍वविद्यालयों में अध्‍यापन और शोध कार्य में बहुसमय तक प्रवृत्‍त रहे हैं। ‘राजभाषा के नये आयाम’ और ‘हिंदी में कंप्‍यूटर के भाषिक आयाम’ शीर्षक उनकी दो मौलिक पुस्‍तकें प्रकाशित हैं।

सम्मान एवं पुरस्कार

सेवानिवृत्ति के उपरांत आप हिंदी और भारतीय भाषाओं के तकनीकी विकास से जुड़े पोर्टल ‘भाषा इंडिया’ से जुड़े हुए हैं श्री मल्‍होत्रा को उनकी सेवाओं के लिए माइक्रोसॉफ्ट का सर्वाधिक प्रतिष्ठित एम.वी.पी. पुरस्‍कार पांच बार प्राप्‍त हो चुका है। श्री विजय कुमार मल्‍होत्रा को आत्‍माराम पुरस्‍कार से सम्‍मानित करते हुए केंद्रीय हिंदी संस्‍थान गौरव का अनुभव कर रहा है।

संपर्क      

डब्‍ल्‍यू.डब्‍ल्‍यू/67/एस.एफ., मैलाबू टाउन, सोहना रोड, गुडगाँव-122018 (हरियाणा)

फोन  –  09910029919
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महेश डी. कुलकर्णी

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श्री महेश डी. कुलकर्णी ने हिंदी सहित अनेक भारतीय भाषाओं की परस्‍पर संवादधर्मी जटिलताओं को ध्‍यान में रखते हुए व्‍यापक तौर पर उनके डिजिटल समाधान का रास्‍ता तैयार किया है। श्री महेश डी. कुलकर्णी का जन्म 20 मई, 1960 को हुआ।

कार्यक्षेत्र

भौतिकी एवं इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स के विद्यार्थी रहे श्री कुलकर्णी ने उस दौर में देश की राष्‍ट्रीय महत्‍व की संस्‍थाओं के साथ जुड़कर संचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्य किया, ज‍ब देश नए कंप्‍यूटिंग युग में प्रवेश कर रहा था। उस दौर में इन्‍होंने भाषा मानकीकरण, प्रौद्योगिकी विकास, अनुसंधान, प्राकृतिक भाषा संसाधन, फॉन्‍ट्स, शब्‍दकोश, की-बोर्ड, हिंदी सर्च इंजन, ऑनलाइन हस्‍तलिपि एवं वर्ण पहचान जैसे क्षेत्रों में अतिविशिष्‍ट कार्यों को अंजाम दिया। इसके अलावा इन्‍होंने हिंदी के अनेक सॉफ्टवेयर भी विकसित किए हैं।

सम्मान एवं पुरस्कार

श्री कुलकर्णी को हिंदी को समर्पित उनकी तकनीकी सेवाओं के लिए अनेक विशिष्‍ट पुरस्‍कारों एवं सम्‍मानों से विभूषित किया गया है। पिछले लगभग ढाई दशक से हिंदी भाषा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत श्री महेश डी. कुलकर्णी को एक अप्रतिम हिंदी सेवी के रूप में आत्‍माराम पुरस्‍कार से सम्‍मानित करते हुए केंद्रीय हिंदी संस्‍थान गौरव का अनुभव करता है।

संपर्क      

एसो. निदेशक एवं विभागाध्‍यक्ष, प्रगत संगणन विकास केंद्र,

चौथी मंजिल, वेस्‍टएंड सेंटर-III, औंघ, पुणे-411007

फोन  –  020-25503401/402
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आत्माराम पुरस्कार वर्ष 2008-09

वर्ष 2008 के आत्माराम पुरस्कार से सम्मानित विद्वान
1. प्रो. यशपाल yashpal
2. मुहम्मद ख़लील muhammad-khalil
वर्ष 2009 के आत्माराम पुरस्कार से सम्मानित विद्वान
1. श्री सुभाष लखेड़ा subhash-lakheda
2. श्री नरेंद्र के. सहगल narendra-sehgal