सोमवार, सित 21

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11वें विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन का उद्घाटन एवं समापन - संस्‍थान की आवाज के साथ

दिनांक 18 से 20 अगस्‍त, 2018 तक मॉरिशस में चले तीन दिवसीय विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन का समापन पोर्ट लुई स्थित गोस्‍वामी तुलसीदास नगर, स्‍वामी विवेकानंद अंतरराष्‍ट्रीय सभागार में हिंदी के बहुआयामी विकास से जुडे नये संकल्‍पों और नये सपनों के मिले-जुले भाव के साथ हुआ। सम्‍मेलन का उद्घाटन संस्‍थान की विदेशी छात्राओं द्वारा वैदिक मंगलाचरण एवं सरस्‍वती वंदना से हुआ तथा समापन भी इन्‍हीं छात्राओं द्वारा प्रस्‍तुत शांति गीत ‘कभी न झगडे निपट सकेंगे बरछी-तीर-कमानों से, दुनिया के झगडे निपटेंगे प्‍यार और मुसकानों से’ के साथ हुआ। यही नहीं महात्‍मा गांधी संस्‍थान मॉरिशस के विद्यार्थियों की आवाज में भी संस्‍थान के कुल गीत ‘भारत जननी एक हृदय हो’ की गूंज पूरे विश्‍व ने सुनी। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज सहित सभागार में उपस्थित देश-विदेश के प्रतिनिधियों ने इसकी मुक्‍त कंठ से सराहना की।

विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन कार्यक्रम का उद्घाटन विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज और मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रवीण कुमार जगन्‍नाथ ने किया। इस अवसर पर भारत के विदेश राज्‍य मंत्री जनरल (रिटा.) वी.के. सिंह, गृह राज्‍य मंत्री किरेन रिजिजू, पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी, गोवा की राज्‍यपाल डॉ. मृदुला गर्ग विशेष रूप से उपस्थित रहे। मॉरिशस की ओर से विष्‍णु लक्ष्‍मी नारायडु इवेन कोलेन डेवेल्‍यू,शिक्षा मंत्री लीला देवी दुकन लछुमन मंचासीन थे।

सम्‍मेलन में हिंदी के अंतरराष्‍ट्रीय प्रचार-प्रसार और बहुआयामी संवर्धन से जुड़ी विभिन्‍न संस्‍थाओं, जानी मानी हस्तियों, शिक्षाविदों,साहित्‍यकारों, पत्रकारों, कलाकारों, हिंदी स्‍वयंसेवकों और बौद्धिक कार्यकर्ताओं ने हिस्‍सा लिया। इन सबके बीच केंद्रीय हिंदी संस्‍थान के प्रतिनिधि मंडल एवं विदेशी छात्रों की भूमिका को सम्‍मेलन में विभिन्‍न अवसरों पर विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

संस्‍थान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्‍व केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्‍यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका ने किया। इनके साथ संस्‍थान के निदेशक प्रोफेसर नन्‍द किशोर पाण्‍डेय, कुलसचिव प्रो. बीना शर्मा, अध्‍यापक शिक्षा विभाग के अध्‍यक्ष प्रो. हरिशंकर, पूर्वोत्‍तर शिक्षण सामग्री निर्माण विभागाध्‍यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित, दिल्‍ली केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा, अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग के अध्‍यक्ष डॉ. गंगाधर वानोडे, सांध्यकालीन पत्रकारिता विभागाध्‍यक्ष श्री केशरी नंदन और भाषा प्रौद्योगिकी विभाग के अध्‍यक्ष श्री अनुपम श्रीवास्‍तव सम्मिलित हुए। संस्‍थान के प्राध्‍यापकों ने सम्‍मेलन की विभिन्‍न विचार गोष्ठियों में अपनी सक्रिय सहभागिता की और अलग-अलग सत्रों में अपनी शैक्षणिक उपस्थिति दर्ज कराई।

मंडल के उपाध्‍यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन परामर्श मंडल के माननीय सदस्‍य थे। इन्‍होंने प्रवासी हिंदी साहित्‍य पर केंद्रित सत्र की अध्‍यक्षता की और मुख्‍य धारा के साहित्‍य के साथ-साथ प्रवासी अध्‍ययन की आवश्‍यकता को समझे जाने पर जोर दिया। प्रवासी साहित्‍यकारों द्वारा रचित साहित्‍य को भारतीय विश्‍वविद्यालयों के विद्यार्थी भी जाने-समझें, इसकी आवश्‍यकता पर बल दिया गया तथा प्रवासी अध्‍ययन केंद्रों तथा अंतर सांस्‍कृतिक शोध कार्यों के माध्‍यम से समकालीन साहित्‍य की आवाज को नये सिरे से समझने का महत्‍व रेखांकित किया।

संस्‍थान के निदेशक प्रो. नन्‍द किशोर पाण्‍डेय ने संस्‍कृति केंद्रित भाषा शिक्षण से संबंधित सत्र का संयोजन किया। अपने उद्बोधन में प्रो. पाण्‍डेय ने संस्‍कृति को भाषा शिक्षण के महत्‍वपूर्ण प्रविधि-संदर्भ के रूप में लिए जाने की आवश्‍यकता जताई। उन्‍होंने कहा कि संस्‍कृति की समुचित समझ-परख किए बिना कोई भी भाषा शिक्षक अपनी कक्षा में सफल और प्रभावी नहीं हो सकता है। भाषा शिक्षण के प्राथमिक चरण पर संरचना शिक्षण आवश्‍यक हो सकता है लेकिन इसके वृहतर परिप्रेक्ष्‍य और उच्‍चतर लक्ष्‍यों के संदर्भ में संस्‍कृति की भूमिका अग्रगामी होती है।

इसके अतिरिक्‍त संस्‍थान के प्रो. उमापति दीक्षित ने ‘वैश्विक हिंदी तथा भारतीय संस्‍कार’ एवं प्रो. बीना शर्मा ने ‘हिंदी विश्‍व एवं भारतीय संस्‍कृति’ विषय पर आलेख प्रस्‍तुत किए। सूचना एवं भाषा प्रौद्योगिकी विभाग के प्राध्‍यापक अनुपम श्रीवास्‍तव ने भाषा प्रौद्योगिकी के आने वाले उत्‍पादों – निकष (हिंदी भाषा दक्षता के प्रशिक्षण, परीक्षण एवं प्रमाणीकरण का ऑनलाइन सिस्‍टम) एवं इमली (भारतीय भाषाओं का बहुभाषी गृह कार्य सहायक उपकरण) के अनुसंधान एवं विकास से संबंधित चर्चा सत्र में सहभागिता की।

इस अवसर पर संस्‍थान द्वारा प्रकाशित पुस्‍तकों, कोश ग्रंथों, पत्रिकाओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसका भारत और मॉरिशस के गणमान्‍य विशिष्‍ट अतिथियों ने आकर संदर्शन किया। मानव संसाधन विकास राज्‍यमंत्री डॉ. सत्‍य पाल सिंह, पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी सहित देश-विदेश के प्रतिनिधियों ने संस्‍थान प्रकाशनों की प्रशंसा की। इसी दौरान संस्‍थान की पत्रिका ‘प्रवासी जगत’ के विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन विशेषांक का लोकार्पण किया गया।

सारांश रूप में शिक्षा और संस्‍कृति से ‘प्रवासी हिंदी साहित्‍य’ तथा ‘हिंदी की साहित्यिक संस्‍कृति के चिंतन’ से लेकर ‘हिंदी भाषा प्रौद्योगिकी के भविष्‍य पथ’ तक विभिन्‍न समानांतर सत्रों में संस्‍थान के प्राध्‍यापकों का योगदान ग्‍यारहवें विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन की उल्‍लेखनीय उपलब्धि बना।

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सांध्यकालीन पाठ्यक्रम (सत्र 2020-21) की प्रवेश सूचना । विज्ञापन - आगरा । विज्ञापन - दिल्ली ।  आवेदन तिथि बढ़ाए जाने संबंधी विज्ञापन (नया) 

शिक्षक दिवस (दि.: 05.09.2020) के अवसर पर केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा आयोजित 'शिक्षकों से संवाद' कार्यक्रम - 'हिंदी शिक्षकों के समक्ष चुनौतियाँ'

दिनांक 18.08.2020 (पू.) से प्रो. बीना शर्मा ने निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान का अतिरिक्त कार्य-दायित्व प्राप्त किया।

दि. 17.08.2020 (अप.) को प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय संस्थान के निदेशक पद से सेवा अवधि पूरी कर अपने मूल संस्था के लिए कार्य-मुक्त हुए।

भारत की नई शिक्षा नीति पर केंद्रित शैक्षिक उन्मेष पत्रिका के आगामी विशेषांक खंडों (ई-पत्रिका) के लिए आलेख आमंत्रण (पत्र डाउनलोड करें) (नया)

के.हिं.शि. मंडल के उपाध्यक्ष महोदय द्वारा माननीय अध्यक्ष जी का अभिनंदन एवं शैक्षणिक-साहित्यिक संवाद

कें.हिं.शि. मंडल के नवनियुक्त उपाध्यक्ष महोदय द्वारा संस्थान मुख्यालय का संदर्शन (दि. 10 जुलाई 2020)

संस्थान द्वारा आयोजित की जाने वाली नियमित पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा सहित सभी परीक्षाएँ आगामी आदेश तक के लिए स्थगित कर दी गई हैं। कार्यालय सूचना देखें (नया)

श्री अनिल कुमार शर्मा  केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के नये उपाध्यक्ष नामित किए गए। (नया)

हिंदी सेवी सम्मान योजना - वर्ष 2017 के पुरस्कारों की घोषणाप्रेस विज्ञप्तिवीडियो प्रेस वार्ता । 

संस्थान मुख्यालय में माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री जी का आगमन, दि. 24.2.2020, रविवार  (फोटो अलबम) (मीडिया रिपोर्ट)

लघु पत्रिकाओं के लिए वित्तीय सहयोग योजना हेतु आवेदन एवं नियम निर्देशिका । सहायता : NGO दर्पण वेब पोर्टल पर यूनिक आई डी बनाने के लिए दिशा निर्देश  

साहित्य अकादमी और केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. नगेंद्र जन्म- 

       शतवार्षिकी समारोहएवं लेखक से भेंट कार्यक्रम
परिचय
  • केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के उच्चतर विभाग द्वारा 1960 ई. में स्थापित स्वायत्त संगठन केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल द्वारा संचालित शिक्षण संस्था है। संस्थान मुख्यतः हिंदी के अखिल भारतीय शिक्षण-प्रशिक्षण, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार के लिए कार्य-योजनाओं का संचालन करता है।
  • संस्थान का मुख्यालय आगरा में स्थित है। इसके आठ केंद्र - दिल्ली (स्था. 1970), हैदराबाद (स्था. 1976), गुवाहाटी (स्था. 1978), शिलांग (स्था. 1987), मैसूर (स्था. 1988), दीमापुर (स्था. 2003), भुवनेश्‍वर (स्था. 2003) तथा अहमदाबाद (स्था. 2006) में सक्रिय हैं।

और..

विकास यात्रा

केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना सन् 1960 में हुई थी। तब से आज तक लगातार मंडल द्वारा निर्धारित लक्ष्यों एवं उद्देश्यों के अनुपालन में संस्थान हिंदी के शैक्षणिक विकास, बहुआयामी अनुसंधान और प्रचार-प्रसार के लिए अपनी गतिविधियों को विस्तार देता रहा है। पाँच दशकों से अधिक लंबी इस विकास-यात्रा के उल्लेखनीय पड़ावों की जानकारी इस खंड में बिंदुवार प्रस्तुत की जा रही है।

...और

विज़न 2021
  • आधुनिकतम संचार माध्यमों और सूचना प्रौद्योगिकी का हिंदी भाषा शिक्षण और दूर शिक्षा के लिए अधिकाधिक प्रयोग
  • यूनिकोड का व्यापक प्रचार और प्रसार
  • एक विशाल पोर्टल और बहुभाषी वेबसाइट
  • पॉप्युलर कल्चर के महत्त्व का रेखांकन, फ़िल्म लोक-नाट्य, कविसम्मेलन और मुशायरे
  • हिंदी की बोलियों का संरक्षण हो तथा देश-विदेश में नए केंद्रों की स्थापना
  • देश-विदेश के हिंदी के प्रख्यात साहित्य शिल्पियों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर फ़िल्में बनाई जाएं
  • विश्व भर की संस्थाओं और विश्वविद्यालयों से सकर्मक जुड़ाव
  • मानकीकृत पाठ्यक्रमों का निर्माण एवं संचालन
  • विश्व के महान साहित्यिक कृतियों और ज्ञान-विज्ञान के ग्रंथों का हिंदी अनुवाद
  • जिन संस्थाओं के पास साधनों का अभाव है, हिंदी के विकास के लिए उनकी मदद

और..

फ़ोटो गैलरी

संस्थान की विविध गतिविधियों से संबंधित छवियों का विस्तृत संग्रह

और...

ओडियो-विजुअल गैलरी

स्वर्ण जयंती वीडियो

केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्वर्ण जयंती

उपयोगी लिंक

हिंदी शिक्षण, हिंदी भाषा संसाधन और संवर्धन से जुड़ी उपयोगी सूचना एवं जानकारियों से जुड़ी वेबसाइटों और वेब-पोर्टलों के लिंक।

और...

ऑनलाइन पत्रिकाएँ

गवेषणा - अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, भाषाशिक्षण तथा साहित्य चिंतन की त्रैमासिक शोध पत्रिका

प्रवासी जगत - प्रवासी जगत का साहित्य, साहित्यकार व संस्कृति केंद्रित पत्रिका

शैक्षिक उन्मेष - शिक्षा जगत की शोध एवं विचार केंद्रित पत्रिका

भावक - हिंदी साहित्य-सृजन एवं चिंतन के विविध आयामों पर केंद्रित पत्रिका

समन्वय पश्चिम - पश्चिम भारत की भाषा, साहित्य एवं संस्कृति संबंधी चिंतन पर केंद्रित पत्रिका

समन्वय पूर्वोत्तर - पूर्वोत्तर भारत की भाषा, साहित्य एवं संस्कृति संबंधी चिंतन पर केंद्रित पत्रिका 

समन्वय दक्षिण - दक्षिण भारत की भाषा, साहित्य एवं संस्कृति संबंधी चिंतन पर केंद्रित पत्रिका

संस्थान समाचार - संस्थान मुख्यालय एवं इसके क्षेत्रीय केंद्रों का त्रैमासिक समाचार बुलेटिन