बुधवार, जून 26

  •  
  •  

गोपाल राय

gopal-ray

प्रो. गोपाल राय का जन्म जुलाई, 1932 ई. में हुआ था। एक यायावर पर्यटक के संघर्ष और फक्कड़पन को अपने व्यक्तित्व में जीवंत किए पटना विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर गोपाल राय हिंदी के वरिष्ठतम आलोचकों की पंक्ति में अग्रगण्य हैं।

रचना कार्य

पिछले पचास वर्ष की लंबी साहित्यिक यात्रा में गोपाल राय ने हिंदी कहानी और उपन्यास के व्यापक फलक को अपनी तत्वदर्शी समीक्षादृष्टि से समृद्ध किया है। 'हिंदी कहानी का इतिहास', 'हिंदी उपन्यास का इतिहास', 'उपन्यास का शिल्प', 'उपन्यास की संरचना' जैसे अनेक विषयों पर केंद्रित गंभीर आलोचनात्मक कार्य के साथ-साथ दो खंडों में प्रकाशित 'हिंदी उपन्यास कोश' और चौदह खंडों के विशाल 'हिंदी साहित्याब्द कोश' आपकी निरंतरगामी सृजनशीलता के परिचायक हैं।

संपादक

हिंदी जगत में प्रोफ़ेसर गोपाल राय को साहित्यिक समालोचना की अग्रणी पत्रिका 'समीक्षा' के संपादक के तौर पर भी पहचाना जाता है, जिसने हिंदी में न केवल साहित्यिक पत्रकारिता की कई उत्कृष्ट परंपराओं को स्थापित किया, बल्कि अपने समय की साहित्यिक सूझ और समझ को भी गहराई से जाँचा और परखा। हिंदी में शोध कर्म की स्तरीयता और प्रामाणिकता के लिए निरंतर कटिबद्ध प्रोफ़ेसर गोपाल राय का अवदान अकादमिक और साहित्यि‍क जगत में समान रूप से स्वीकृत है। आप हिंदी के विकास से जुड़ी अनेक उच्च स्तरीय सरकारी और ग़ैर सरकारी संस्थाओं की समितियों से संबद्ध रहे हैं।

Hindi-sevi-samman-3

पुरस्कार

'एकला चलो रे' के कर्मठ संकल्पबोध के साथ निरंतर सक्रिय और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिष्ठित पुरस्कारों से अनेक बार सम्मानित गोपाल राय को उनकी लंबी साहित्यि‍क यात्रा के लिए 'महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार' अर्पित करते हुए 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' कृतज्ञता का अनुभव कर रहा है।