रविवार, अग 18

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नरेंद्र के. सहगल

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नरेंद्र के. सहगल का जन्म नबम्बर, 1940 ई. में हुआ था। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सलाहकार और प्रमुख रह चुके डॉ. नरेंद्र के. सहगल भारत के अंतरराष्ट्रीय विज्ञान प्रोत्साहन कार्यक्रम के परिकल्पनाकार के रूप में जाने-पहचाने जाते हैं। इन्होंने आम जन के बीच वैज्ञानिक चेतना के प्रचार-प्रसार और संचार से जुड़े उन कार्यक्रमों की शुरुआत की है, जो अपने क्षेत्र में मील के पत्थर की हैसियत रखते हैं।

जीवन परिचय

मूलतः भौतिकीविद डॉ. सहगल ने अपने कैरियर की शुरुआत 'भाभा रिसर्च इंस्टीट्यूट' में वैज्ञानिक अधिकारी के रूप में की थी। वर्तमान में आप 'वैज्ञानिक चेतना वर्ष' (वाई.एस.ए.) 2004 की राष्ट्रीय आयोजन समिति के अध्यक्ष हैं। डॉ. नरेंद्र के. सहगल भारत में प्रतिवर्ष 28 फ़रवरी को मनाए जाने वाले 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' के प्रणेता हैं। आप 'अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क', 'एन.सी.एस.टी.सी. नेटवर्क' और इसी प्रकार के अनेक विज्ञान आंदोलनों के सूत्रधार भी बने।

संपादक और प्रकाशक

1972-1976 तक आप त्रैमासिक पत्रिका 'साइंटिफ़िक ओपीनियन' के संस्थापक संपादक और प्रकाशक भी रहे। इसी दौरान डॉ. सहगल प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका 'नेचर' से आमंत्रित सहयोगी के रूप में भी जुड़े। सन 1987 से 2000 के बीच आप 'एन.सी.एस.टी.सी.' की द्विभाषी पत्रिकाओं 'एन.सी.एस.टी.सी. कम्युनिकेशन' और 'राविप्रौसंप संचार' के संपादक और विज्ञान प्रसार के मासिक पत्र 'ड्रीम-2047' के संपादक भी रहे।

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पुरस्कार व सम्मान

विज्ञान के लोकप्रियकरण के लिए यूनेस्को के प्रतिष्ठित 'कलिंग पुरस्कार' सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत डॉ. नरेंद्र के. सहगल अपनी संपूर्ण रचनात्मकता और दूरदृष्टि के साथ वैज्ञानिक संचेतना के बहुआयामी संवाद सूत्रों को पढ़ने और गढ़ने में निरंतर सक्रिय बने हुए हैं। ऐसे प्रखर, मेधावी और प्रेरक व्यक्तित्व एवं कृतित्व के धनी डॉ. नरेंद्र के. सहगल को 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने बड़े हर्ष का अनुभव करते हुए 'आत्माराम पुरस्कार' प्रदान किया है।