शुक्रवार, दिस 13

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मुहम्मद ख़लील

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मुहम्मद ख़लील का जन्म जनवरी, 1944 ई. में हुआ था। इन्होंने 'दिल्ली विश्वविद्यालय' के कॉलेज से विज्ञान प्राध्यापक के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की थी। एक वनस्पति विज्ञानी के रूप में मुहम्मद ख़लील पिछले 35 वर्षों से वैज्ञानिक साहित्य, विशेषतः बाल विज्ञान लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। जन सामान्य के बीच विज्ञान के लोकप्रियकरण के लिए आप विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में हिंदी, उर्दू और अँग्रेज़ी में समान रूप से क़लम चलाते रहे हैं।

भाषा-शैली

आम बोलचाल की सरल, सरस और रोचक भाषा-शैली मुहम्मद ख़लील के लेखन की पहचान रही है। पर्यावरण, पशु-पक्षी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, वैज्ञानिकों की जीवनियाँ, वैज्ञानिक खोजें और आविष्कार, सामयिक विज्ञान समाचार और वार्ता आदि विभिन्न विधाओं में रचित बाल विज्ञान साहित्य से संबंधित तीन सौ से भी अधिक रचनाओं के अलावा एक हज़ार से भी अधिक लेख और दस पुस्तकें उनकी अथक और निरंतर विज्ञान साहित्य साधना का प्रमाण हैं। आपने सी.एस.आई.आर., नई दिल्ली से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'साइंस की दुनिया' का तीस साल तक संपादन किया है।

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वैज्ञानिक सोच और व्यवहार

आम पाठक और ख़ासकर बच्चों के बीच प्रगतिशील वैज्ञानिक सोच को एक मूल्य और जीवन-व्यवहार के तौर पर विकसित करने की मुहम्मद ख़लील की रचनात्मक विचारदृष्टि और उत्कृष्ट सृजनकर्म के लिए देश की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं के सम्मान आपको प्राप्त हुए हैं। विज्ञान शिक्षक, विज्ञान पत्रकार और वैज्ञानिक तीनों रूपों में चर्चित और प्रतिष्ठित मुहम्मद ख़लील के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित 'विज्ञान पत्रिका' का एक विशेषांक भी प्रकाशित हो चुका है।

सम्मान और पुरस्कार

ऐसे समर्पित विज्ञानव्रती मुहम्मद ख़लील को विज्ञान लेखन के क्षेत्र में रचनात्मक योगदान के लिए 'आत्माराम पुरस्कार' से 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' ने सम्मानित किया है।