बुधवार, अक्टू 23

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यशपाल

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प्रो. यशपाल का जन्म 26 नवम्बर, 1926 ई. में हुआ था। जाने-माने वैज्ञानिक और शिक्षाविद प्रो. यशपाल का नाम विज्ञान और तकनीकी के जिज्ञासु विद्यार्थियों के बीच अनजाना नहीं है। दूरदर्शन के लोकप्रिय विज्ञान धारावाहिक 'टर्निंग प्वाइंट' में 'विज्ञान गुरु' की भूमिका में आप विज्ञान और प्रकृति के तमाम रहस्यों से पर्दा उठाते रहे हैं।

शिक्षा तथा कार्यक्षेत्र

यशपाल जी ने पंजाब विश्वविद्यालय से 1949 में भौतिकी की डिग्री के साथ अपनी स्नातक की शिक्षा पूरी की और इसके बाद 1958 में 'मैसेश्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इसी विषय पर पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की। वैज्ञानिक तथ्यों और प्रक्रियाओं को आम बोलचाल की भाषा में जन-जन तक पहुँचाने के लिए अत्यंत लोकप्रिय प्रो. यशपाल का मानना है कि विज्ञान और तकनीक व्यक्ति की जिज्ञासा को शांत करने और जीवन में आगे बढ़ने का सशक्त माध्यम है। प्रो. यशपाल दुनिया के अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में कार्य कdर चुके हैं।

योगदान

एनिमल फ़िजियोलॉजी, भौतिक विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, हाई एनर्जी और एस्ट्रोफ़िजिक्स के क्षेत्र में आपका उल्लेखनीय योगदान रहा है, जिसे कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता। यशपाल जी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रचार-प्रसार से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों, संस्थाओं के साथ-साथ शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नव प्रवर्तन के लिए भारत सरकार द्वारा गठित अनेक उच्च स्तरीय समितियों के सम्मानित सदस्य और सलाहकार भी रह चुके हैं।

वैज्ञानिक सुझाव

वैज्ञानिक, विज्ञान शिक्षक, प्रेरक, योजनाकार आदि विभिन्न भूमिकाओं में प्रो. यशपाल विज्ञान और समाज के मजबूत रिश्तों को देखते हैं। आपने भारत के ग्रामीण और दूरदराज सीमांत क्षेत्रों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सूचना और संचार तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के क्रांतिकारी रास्ते सुझाए हैं और विकासशील देशों की आवश्यकताओं और सीमाओं के अनुरूप उपलब्ध संसाधनों और विभिन्न आधुनिक तकनीकों के उपयोग का ख़ाक़ा तैयार किया है।

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पुरस्कार

अज्ञान के अँधेरे से प्रगति की नई सुबह की ओर ले जाने वाले 'टर्निंग प्वाइंट' पर खड़े ऐसे मनस्वी विज्ञान ऋषि प्रो. यशपाल को आमजन की भाषा में विज्ञान और तकनीकी के बहुआयामी और बहुउद्देश्यीय प्रचार-प्रसार के लिए 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' द्वारा 'आत्माराम पुरस्कार' दिया गया है। इस पुरस्कार को अर्पित करते हुए संस्थान ने स्वयं को अत्यंत हर्षित और गौरवान्वित महसूस किया है। प्रो. यशपाल को भारत सरकार द्वारा सन 1976 में विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए 'पद्मभूषण' से भी सम्मानित किया जा चुका है।