गुरुवार, जुल 18

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गहन हिंदी शिक्षण

संस्थान में सर्वप्रथम गहन हिंदी शिक्षण पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार की मॉड्यूल और शिक्षण-सामग्री के मॉडल तैयार किए। मई 1970 में ए-13 ग्रीन पार्क में संस्थान ने अपना गहन पाठ्यक्रम शुरू किया। इस पाठ्यक्रम में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, जैसे उप महालेखापाल, महा डाकपाल स्तर के, 13 अधिकारियों ने भाग लिया। पाठ्यक्रम के लिए पूरी सामग्री संस्थान के अध्यापकों ने ही तैयार की थी। इस कार्यक्रम की देख-रेख के लिए आगरा से दो वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. रमानाथ सहाय और प्रो. न. वी. राजगोपालन आते थे और कार्यक्रम का शैक्षिक संचालन डॉ. वी. रा. जगन्नाथन करते थे और अध्यापन में उनके साथ सहयोगी प्राध्यापक थे, डॉ. ठाकुरदास, डॉ. डी. पी. गांधी और डॉ. शारदा जग्गी ( बाद में शारदा भसीन )। पहले पाठ्यक्रम के बाद डॉ. जगन्नाथन को जुलाई में 'क्षेत्रीय निदेशक' का दायित्व सौंपा गया। यह गहन पाठ्यक्रम 1970 से 1985 तक चला और भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों को हिंदी में प्रशिक्षित किया गया।

1976 में भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के अंतर्गत 'केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान' की स्थापना की गई और उसके तत्वाधान में अखिल भरतीय स्तर पर विभिन्न स्तर के अधिकारियों के लिए इसी प्रकार के गहन हिंदी शिक्षण कार्यक्रम चलाए जाने लगे। परिणामस्वरूप दिल्ली केंद्र के 'गहन हिंदी शिक्षण कार्यक्रम' में प्रतिभागियों की संख्या क्रमश: घटती गई। अत: संस्थान ने सुझाव दिया कि औपचारिक रूप से दिल्ली केंद्र से इस पाठ्यक्रम कों 'प्रशिक्षण संस्थान' को पूर्ण रूप से स्थानांतरित कर दिया जाए। अत: 1985 में केंद्र के 'गहन हिंदी शिक्षण कार्यक्रम' को राजभाषा विभाग को सौंप दिया गया।

गहन हिंदी शिक्षण में प्रयुक्त सामग्री का हिंदी विद्वानों और प्रशिक्षार्थियों द्वारा स्वागत किया गया। अत: आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने इसे प्रकाशित करने की इच्छा प्रकट की, जिसे संस्थान ने सहर्ष स्वीकार किया। आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा 'गहन हिंदी शिक्षण' नाम से चार भागों में यह सामग्री वर्ष 1971 और 1973 के बीच प्रकाशित की गई।