रविवार, सित 15

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शोध कार्यक्रम

संस्थान में शोध और सामग्री निर्माण के कार्य मुख्य रूप से मुख्यालय आगरा में संचालित होते रहे हैं इस दृष्टि से दिल्ली केंद्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
दिल्ली केंद्र में अब तक तीन प्रमुख शोध तथा सामग्री निर्माण की योजनाएँ सम्पन्न हो चुकी है-

  1. दिल्ली केंद्र में लद्दाखी भाषा संबंधी शोध का प्रकोष्ठ अस्सी के दशक में स्थापित हुआ था, जिसमें संयुक्ता कौशल कार्यरत थीं। इस योजना के अंतर्गत जम्मू कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में भाषा सामग्री का संकलन किया गया और उसके लिप्यंकन के पश्चात लद्दाखी भाषा का विवरणात्मक अध्ययन किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत ‘कंवर्सेशनल लद्दाखी' और लद्दाखी ग्रामर' पुस्तक का प्रकाशन हुआ है।
  2. गहन हिंदी शिक्षण कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने संस्थान को डाक तार विभाग के डाकियों को देवनागरी लिपि से परिचित कराने के लिए एक लघु अवधि के पाठ्यक्रम का निर्माण करने का कार्य सौंपा था। दिल्ली केंद्र ने यह पाठ्यक्रम तैयार किया, जिसमें हस्तलिखित पतों को पढने का अभ्यास भी शामिल किया गया था। यह सामग्री गृह मंत्रालय द्वारा प्रकाशित की गयी और पूरे देश में यह पाठ्यक्रम चलाया गया था।
  3. वर्ष 1988-89 में तत्कालीन इलैक्ट्रॉनिक विभाग ने संस्थान के दिल्ली केंद्र को कंप्यूटर द्वारा भाषा शिक्षण के लिए सामग्री निर्माण की परियोजना का कार्य सौंपा था, जिसके संयोजक थे तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक प्रो. मां. गो. चतुर्वेदी। यह सामग्री 'कम्प्यूटर संसाधित हिंदी शिक्षण एवं सर्जनात्मक लेखन शिक्षण' के शीर्षक से 1989 में संस्थान द्वारा प्रकाशित की जा चुकी हैं कंप्यूटर की सहायता से विदेशी भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण और हिंदी कार्पोरा और कोश निर्माण के लिए संस्थान के दिल्ली केंद्र के तत्कालीन प्रभारी प्रो. मां. गो. चतुर्वेदी ने एक प्रस्ताव भारत सरकार के इलैक्ट्रॉनिक विभाग को अनुदान के लिए प्रेशित किया था। प्रस्ताव के अनुसार यह कार्य दिल्ली के आई आई टी के कंप्यूटर विभाग के साथ मिलकर किया गया था। इसके लिए दस लाख चालीस हजार रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ था। प्रस्ताव के स्वीकृत होने के बाद इस परियोजना पर कार्य प्रांरभ किया गया। संस्थान के दिल्ली केंद्र ने 'देवनागरी (वर्ण) शिक्षक' नाम से एक प्रोग्राम विकसित किया है तथा ऐसे ही अन्य मॉड्यूल बनाए हैं, जिनका उपयोग शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों कर सकते हैं।
  4. इस समय दिल्ली केंद्र के पास एक महत्वाकांक्षी शोध परियोजना है 'हिंदी के लघु विश्वकोश का निर्माण' प्रो. इंद्र नाथ चौधरी इस परियोजना के संयोजक हैं। यह कार्य तेजी से आगे बढ रहा है।