मंगलवार, दिस 07

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माननीय शिक्षा मंत्री जी का उद्बोधन

केंद्रीय हिंदी संस्थान हैदराबाद के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन के अवसर पर केंद्रीय हिंदी संस्थान के सभी उपस्थित सभी अधिकारीगण, कर्मचारीगण, उस क्षेत्र की संपूर्ण उपस्थित जनता, हमारे साथ जुड़े हमारे राज्यमंत्री श्री धोत्रे जी, तेलंगाना सरकार के मंत्री मल्ला रेड्डी जी, जिनका अभी हमको मार्गदर्शन मिला। हमारे सांसद रेवंत रेड्डी जी, सचिव अमित खरे जी, हमारे छावनी विधायक जी. सयाना जी, केंद्रीय हिंदी संस्थान के यशस्वी उपाध्यक्ष श्री अनिल शर्मा जोशी जी, केंद्रीय हिंदी संस्थान की निदेशक प्रो. बीना जी और यहाँ पर सभी उपस्थित हिंदी शिक्षण मंडल के सदस्यगण !
मुझे लगता है कि हम सब एक अच्छे काम के लिए इस विकट स्थिति में एकत्र हुए हैं जबकि कोरोना से पूरी दुनिया संकट से गुजर रही है। ऐसे वक्त में भी हम सब लोग ऐसे भवन के उद्घाटन के लिए यहाँ पर एकत्रित हैं। जो हिंदी के लिए समर्पित हैं जो भारत की भाषाओं उनके उत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण हिंदी के लिए काम करने वाले लोग और हिंदी को सीखने वाले, पढ़ने, पढ़ाने वाले और उसके साहित्य में रुचि रखने वाले हिंदी का वैभव पूरी दुनिया में विकसित करने वाले, ऐसे सभी लोग आज देश और दुनिया के इस अवसर पर हमारे साथ जुड़े हुए हैं। मैं उन सभी लोगों का अभिवादन करता हूँ, सम्मान कर रहा हूँ।

मुझे इस बात की खुशी है कि तेलंगाना गर्वमेंट ने एक अच्छे संस्थान के लिए जमीन उपलब्ध कराई और भारत सरकार के तत्कालीन शिक्षा राज्य मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तत्कालीन मंत्री ने उसका शिलान्यास किया जो बहुत विद्वान आदमी हैं और उसके बाद आज 2018 के बाद पूरे 2 वर्ष से पहले ही हम लोकार्पण के लिए एकत्रित हुए हैं। यह बहुत कम होता है कि 2 साल में संस्थान कोई निर्माण कार्य पूरा कर दे।

हमारे लिए बहुत सुखद क्षण है। यह श्रेय मैं हैदराबाद केंद्र को, इस संस्थान के उपाध्यक्ष जी को सब लोगों को बधाई देता हूँ। शुभकामना देता हूँ और बधाई भी देता हूँ कि आप बहुत अच्छे समय पर आपने किया है।

माननीय मंत्री रेड्डी जी जो श्रम रोजगार और महिला बाल विकास मंत्री हैं और समझ सकते हैं, महिला कल्याण के भी हैं। मुझे लगता है कि उनके द्वारा पहले बताया गया कि शिलान्यास में उस समय वे थे। माननीय मुख्यमंत्री जी भी यहाँ थे और मुझे लगता है कि कोई हिंदी के लिए बड़े संस्थान की प्रतीक्षा तेलंगाना मुख्यमंत्री जी से कर रहे हैं ताकि वो हमारे बीच रहें आ सकें। तो मैं रेड्डी जी से कहूँगा कि मेरी ओर से मुख्यमंत्री जी को तेलंगाना के मुख्यमंत्री जी को बधाई दीजिएगा, शुभकामना दीजिएगा और इस अच्छे संस्थान के अच्छे लोगों को साधुवाद दीजिएगा कि आप जिस रुचि से देखता हूँ तेलंगाना में आप बहुत अच्छे तरीके से हिंदी का प्रचार-प्रसार हुआ है और ये जो केंद्र है हैदराबाद का यहाँ से हिंदी को लेकर बाहर जा रहे हैं देश के विभिन्न कोनों में जब मुझे इस राज्य के अच्छी हिंदी बोलते हुए लोग मिलते हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है तो मैं बोलता हूँ। इतनी अच्छी हिंदी बोल रहे हैं तो वो बताते हैं कि हमारा केंद्र है और हर वर्ष हजारों लोग हिंदी की परीक्षाओं को भी देते हैं। मुझे लगता है कि उस विजन को, गांधी के उस मिशन को, गांधी के उस सपने को साकार कर रहे हैं जिसमें देश आजादी के बाद जो गांधी जी ने पहले सोचा था।

इस देश में हमारी जो 22 संविधान में बहुत खूबसूरत में जो बाइस भारतीय भाषाएँ हैं तमिल है, तेलुगु है, मलयालम है, कन्नड़ है, गुजराती है, मराठी है, बंगाली है, ओड़िया है, संस्कृत है, हिंदी है, उर्दू है, पंजाबी है, असमिया है ये हमारी जो बाइस बहुत सुंदरतम् भारत की भाषाएँ हैं जो संविधान के अनुच्छेद अनुसूची 8 में हमको प्राप्त हैं। इन बाइस की बाइस भाषाओं को और सशक्त करने का हमको काम करना है और इसके बीच में संपर्क के रूप में एक सौहार्द के रूप में हिंदी को एक लड़ी के रूप में सबको जोड़ने का जो महत्वपूर्ण काम हमारे देश आजादी से पहले गांधी ने किया था, भीमराव अंबेडकर ने दिया था और जिसमें संविधान में उल्लेख भी रहा कि हिंदी को राजभाषा का दर्जा देकर के और हिंदी की सशक्तता के लिए ये जो भारत की बाइस भारतीय भाषाएँ हैं यदि जरूरत पड़ती है तो उनके से भी शब्दों को लेकर के इसकी सामर्थता बढ़ाई जाए और इसको संपर्क सूत्र में देश को एक सूत्र में बांधने की भाषा सुनिश्चित किया जाए क्योंकि इसमें शब्द भंडार भी है, शब्द संपदा भी है। मुझे लगता है कि शायद दुनिया में शायद यही एक ऐसी भाषा होगी संभवतः जिसका 9 लाख से भी अधिक शब्द संपदा है तो ये शब्द संपदा भी उसकी इसलिए बढ़ी है कि साथ-साथ ये जो हमारी बाइस भारतीय भाषा हैं इसको ताकत मिलती है और वे एक-दूसरे को पिरोकर के रखती हैं जरूरत है।

आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हिंदुस्तान में जो 30 करोड़ से भी अधिक लोगों को इस देश में एक दूसरे से जोड़ता है। 130 करोड़ ये जो भाषाएँ एक दूसरे से जोड़कर रखती हैं यह हमारी खूबसूरती भी है, ये हमारी ताकत भी है, और इसीलिए आपने देखा होगा कि अभी हम नई शिक्षा नीति में भाषा को लाये हैं, हमने कहा कि मातृभाषा। मातृभाषा वहाँ की जो क्षेत्रीय भाषा में बच्चा पढ़ेगा अपनी भाषा तो वो बच्चे की अभिव्यक्ति भी बाहर निकलकर के आयेगी और उस प्रदेश की वो भाषा भी हमारे देश की वो भाषा भी जिंदी रहेगी क्योंकि भाषा केवल शब्द नहीं है हमारी भावना हैं भाषा हमारी संपदाय है हमारी संस्कृति के ये संस्कार है जीवन मूल्य हैं भाषा के अंदर हमारी परंपरायें हैं सब कुछ नियत है इन भाषाओं के अंदर इनको हम टूटने नहीं दे सकते। मजबूती के साथ दुनिया में हिंदुस्तान ही एक ऐसा देश है जिसमें विविधता में भी एकता है तमाम सभी जितनी भाषाएँ हैं और बोलियां हैं हजारों, हजारों बोलियां हैं। जो हमारी ये भाषाएं हैं। भाषाओं को कैसे एक सूत्र में पिरो सकते हैं वो काम हिंदी का भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मुझे आशा है कि इन परिस्थतियों में जबकि पूरी दुनिया में हिंदी का गौरव मैं देखता हूँ माॅरिशस, इण्डिोनेशिया, मलेशिया हो, ट्रिनीडाड हो, तमाम देशों में जब जाना होता है और अनिल जी तो दुनिया के देशों में घूमे हैं ये तभी इस मंत्रालय में हिंदी के काम को करते थे अब मुझे याद आता है कि जब उत्तराखंड का मैं मुख्यमंत्री था तब ये विदेश में थे तब विदेशी बच्चों को लेकर ये आगरा आए थे जिसके स्वयं वे अब उपाध्यक्ष हो गए हैं। मेरे उत्तराखंड आये थे हरिद्वार आये थे तो मैं ये समझता हूँ कि दुनिया में हिंदी को सीखने के प्रति अभीप्सा है जिज्ञासा है उनको लगता है कि हिंदुस्तान को समझना है तो हिंदी का जरूर जानना है और मैं सोचता हूँ दुनिया में हिंदी का जिस तरह से सम्मान बढ़ा है इसे और भी बहुत मतबूत कर सकते हैं और इस मजबूती के पीछे हमारे दक्षिण भारत के जितने भी राज्य उनका बहुत बड़ा योगदान हैं गांधी जी ने इसीलिए दक्षिण भारत हिंदी प्रचारिणी सभा को करके वैतरणिक दान किया था मुझे लगता है कि जिस तरीके से केंद्रीय हिंदी संस्थान के ये जो आठ केंद्र हैं हैदराबाद, गुवाहाटी, दीमापुर, शिलांग, मैसूर, भुवनेश्वर, अहमदाबाद और दिल्ली ये आठों केंद्र हिंदी के लिए समर्पित हैं जो हिंदी को पढ़ा रहे हैं सिखा रहे हैं, पाठ्यक्रमों में सम्मिलित कर रहे हें और मुझे लगता है कि ये जो आठ केंद्र हैं अभी भी सब लोग जुड़े हुए होंगे। मुझे उन आठो केंद्रों से अपेक्षा है कि गतिशीलता से काम करते हैं उनके प्रति लोगों में जो आकर्षकता है कैसे इसको बढ़ा सकते हैं। राज्यों में ये केंद्र हैं वहां पर कैसे करके मदद कर सकते हैं। 130 करोड़ लोगों के साथ सीधे संवाद पहुंचा सकते हैं हिंदी के माध्यम से मुझे इस बात को कहते हुए खुशी होती है।

सुबह अनिल जी से बात हो रही थी कि अनिल जी ने मुझे बताया कि इस केंद्र की जो स्थापना है स्थापना ही जिनको हम लोग बात कर रहे थे केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा ही जिसकी स्थापना जिसकी आठ शाखाएँ हैं इसकी स्थापना डाॅ0 मोटूरि सत्यनारायण ने की थी, जो महात्मा गांधी के अनन्य अनुयायी थे उन्होंने किया हिंदी के प्रति प्रेम और लगाव था उन्होंने आगरा में हिंदी संस्थान की स्थापना कर पूरे देश के अंदर हिंदी को कैसे कर विकसित किया जा सकता है। तेलंगाना की धरती पर रहकर पद्मभूषण डाॅ. सत्यनारायण मोटूरि जी ने केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना की, ये कोई छोटी बात नहीं। आज हम बहुत याद कर रहे हैं।

हमें संकल्प लेने की भी आवश्यकता है इस केंद्र को हैदराबाद केंद्र को भी और मेरे केंद्रीय हिंदी संस्थान को भी कि उसे सभी आठ के आठ शाखाएं हैं ये जो आठ के आठ क्षेत्रीय कार्यालय हैं उसी गतिशीलता से काम करें हमको तो मालूम है कि गांधी ने भी कहा था कि जिस राष्ट्र की अपनी भाषा नहीं है वो गूँगा है इसलिए ये समय आ गया है कि अंबेडकर जी के सपनों को साकार करना है।  गांधी जी और अंबेडकर जी ने भी सब तरीके से हर जगह हर स्थान पर कहा भाषा बहुत जरूरी है एक सूत्र में पिरोने वाली ये पहचान देने वाली है हिंदुस्तान से बाहर होंगे किसी देश में कोई व्यक्ति हिंदी में भाषण देता है तो वह हिंदुस्तानी होगा। अटल जी ने पहली बार भाषण दिया था यू.एन. में तो कितना दुनिया में कितना उनकी धाक जमीं थी।

मैं एक बार फिर बधाई देता हूँ मेरी शुभकामना है कि इस केंद्र को और सशक्त और मजबूत करेंगे और हिंदी का वैभव पूरी दुनिया में विकसित करेंगे ताकि देश को गौरव हो सके। बहुत-बहुत धन्यवाद।

शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों से संवाद

केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा द्वारा आयोजित शिक्षक दिवस के अवसर पर

शिक्षकों से संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत ‘हिंदी शिक्षको के समक्ष चुनौतियाँ’ विषयक एक दिवसीय वेब संगोष्ठी
संयोजन : केंद्रीय हिंदी संस्थान, दिल्ली केन्द्र
तकनीकी समन्वय - सूचना तथा भाषा प्रौद्योगिकी विभाग, मुख्यालय आगरा
स्वागत भाषण और माननीय वक्ताओं का परिचय - प्रो० महेन्द्र सिंह राणा, क्षेत्रीय निदेशक, दिल्ली केंद्र
उद्घाटन उद्बोधन (वीडियो संदेश) - डॉ० रमेश पोखरियाल निशंक, माननीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार एवं अध्यक्ष, केन्द्रीय हिन्दी शिक्षण मंडल
विषय-प्रस्तावना - प्रो० बीना शर्मा, निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान
केन्द्रीय हिन्दी संस्थान की ‘भारतीय शिक्षा शास्त्री’ पुस्तक श्रृंखला के अन्तर्गत निर्मित पुस्तक‘डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन’ के ई पुस्तक संस्करण का विमोचन

संगोष्ठी संवाद के विद्वान वक्ताओं के उद्बोधन
१) सुप्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो० जे०एस० राजपूत
२) भाषावैज्ञानिक प्रो० वी०रा० जगन्नाथन
३)वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव
अध्यक्षता - श्री अनिल शर्मा जोशी, माननीय उपाध्यक्ष, केन्द्रीय हिन्दी शिक्षण मंडल
संचालन - डॉ० प्रमोद शर्मा, एसोसिएट प्रोफ़ेसर, दिल्ली केंद्र
आभार वक्तव्य - प्रो० हरिशंकर, शैक्षिक समन्वयक, आगरा मुख्यालय

संगोष्ठी प्रतिवेदन

आगरा, ०५ सितंबर, २०२०।

केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों से संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत ‘हिंदी शिक्षको के समक्षचुनौतियाँ’ विषयक एक दिवसीय वेब संगोष्ठी सम्पन्न हुई। इसके संयोजन का दायित्व संस्थान के दिल्ली केन्द्र को दिया गया।तकनीकी समन्वय का कार्य मुख्यालय आगरा के सूचना तथा भाषा प्रौद्योगिकी विभाग ने किया।

शिक्षकों से संवाद कार्यक्रम का प्रारम्भ दिल्ली केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक प्रो महेन्द्र सिंह राना के स्वागत भाषण और माननीय वक्ताओं केपरिचय से हुआ. इसके उपरांत डॉ० रमेश पोखरियाँ निशंक, माननीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया।मंत्री महोदय के उद्घाटन संबोधन के बाद संस्थान की निदेशक प्रो० बीना शर्मा ने विषय की प्रस्तावना रखी। इसी क्रम में शिक्षक दिवस केअवसर पर केन्द्रीय हिन्दी संस्थान की ‘भारतीय शिक्षा शास्त्री’ पुस्तक श्रृंखला के अन्तर्गत तैयार पुस्तक ‘डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन’ केई पुस्तक संस्करण का विमोचन उपाध्यक्ष महोदय द्वारा किया गया।

मुख्य संगोष्ठी संवाद के विद्वान वक्ता सुप्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो० जे०एस० राजपूत, भाषावैज्ञानिक प्रो० वी०रा० जगन्नाथन और वरिष्ठपत्रकार राहुल देव थे जिन्होंने इस वेब संगोष्ठी में विभिन्न माध्यमों से जुड़े देश विदेश के हिंदी शिक्षको से संवाद किया। इन्होंने न केवलअपने सारगर्भित उद्बोधन से हिंदी शिक्षकों को प्रेरित किया बल्कि उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

मुख्य वक्ता डॉ०जे०एस० राजपूत ने प्राथमिक स्तर पर महिला शिक्षको की नियुक्ति की ज़रूरत को रेखांकित किया। विद्यार्थियों कोशिक्षित करने में शिक्षक के साथ-साथ परिवार की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता को समझाने का कामअध्यापको का है. उन्हें पढाया नहीं जा सकता, हाँ सिखाया अवश्य जा सकता है। शिक्षण के वृहद् लक्ष्यों की ओर संकेत करते हुएबताया कि सम्पूर्णता मनुष्य मे ह्रदय में है, उसका आविष्कार करना है। रामचरितमानस की चौपाई ‘रावण रथी राम रथहीना’ के उदाहरणसे समझाया कि धीरज और शौर्य से हर कठिन से कठिन रण जीता जा सकता है। भाषा का पहला काम संस्कृति को सुदृढ करना है।इसके लिए अध्ययन और चिन्तन-मनन जरूरी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हिंदी के संवर्धन के लिए हिन्दी संस्थानो को शोध करना है।

दूसरे वक्ता प्रसिद्ध भाषा शिक्षणविद् प्रो० जगन्नाथन ने हिंदी के विकास के लिए समग्रता की दृष्टि लेकर चलने की बात ज़ोर देकर कही।भारतीय भाषाओं की सर्वांगीण उन्नतियाँ लिए त्रिभाषा सूत्र का सही तरीके से पालन करने पर बल दिया और बताया कि नये युग मेंप्रौद्योगिकी की सहायता से भाषा अध्यापकों को बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकता है.

जाने-माने पत्रकार और भाषा चिंतक राहुल देव ने अपने संबोधन में कहा हिन्दी जीवन की भाषा है। आज हिन्दी अध्यापक हिन्दी विरोधीवातावरण में काम कर रहा है।उसे वह मान सम्मान प्राप्त नहीं जिसका वह अधिकारी है। इस स्थिति को बदलने के लिए हिन्दी अध्यापकोअपनी पूरी ऊर्जा और प्रौद्योगिकी इसमें लगा देनी है। उनका कहना था कि हिंदी प्रेम के नाम पर दूसरी भाषाओं से बचना बिदकना और कतराना नहीं है बल्कि उनमें उपलब्ध श्रेष्ठ ज्ञान संपदा का समुचित उपयोग करना है।

इस वेब संगोष्ठी कार्यक्रम के अध्यक्ष केन्द्रीय हिन्दी शिक्षण मंडल के माननीय उपाध्यक्ष श्री अनिल शर्मा जी थे। उन्होंने अपने उद्बोधन मेंहिंदी के भविष्यगामी विकास के लिए भाषा प्रौद्योगिकी से जुडने, अन्य भाषाओं के साहित्य को हिंदी अनूदित कर संस्थान वेबसाइट केमाध्यम से व्यापक उपयोग हेतु उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ० प्रमोद शर्मा, एसोसिएट प्रोफ़ेसर, दिल्ली केंद्र ने किया।


 

माननीय शिक्षा मंत्री का वीडियो संदेश यूट्यूब चैनल पर :
https://youtu.be/7m7dCGQkk8Q


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नियमित अध्यापक शिक्षा पाठ्यक्रम सत्र 2018-19 मुख्य परीक्षा परिणाम

MAIN EXAM RESULT, SESSION 2018-19 OF KHS TEACHERS EDUCATION DEPARTMENT


 

हिंदी शिक्षण निष्णात -प्रथम वर्ष / Hindi Shikshan Nishnat - I Year

हिंदी शिक्षण निष्णात - द्वितीय वर्ष / Hindi Shikshan Nishnat - II Year

हिंदी शिक्षण पारंगत - प्रथम वर्ष / Hindi Shikshan Parangat - I Year

हिंदी शिक्षण पारंगत - द्वितीय वर्ष / Hindi Shikshan Parangat - II Year

हिंदी शिक्षण पारंगत - द्वितीय वर्ष गुवाहाटी / Hindi Shikshan Parangal - II Year Guwahati

हिंदी शिक्षण प्रवीण - प्रथम वर्ष / Hindi Shikshan Praveen - I Year

हिंदी शिक्षण प्रवीण - द्वितीय वर्ष / Hindi Shikshan Praveen - II Year

त्रिवर्षीय हिंदी शिक्षक डिप्लोमा (नागालैंड) - प्रथम वर्ष / 3Years  Hindi Teachers Diploma (Nagaland) - I Year

त्रिवर्षीय हिंदी शिक्षक डिप्लोमा (नागालैंड) - द्वितीय वर्ष / 3Years  Hindi Teachers Diploma (Nagaland) - II Year

त्रिवर्षीय हिंदी शिक्षक डिप्लोमा (नागालैंड) - तृतीय वर्ष / 3Years  Hindi Teachers Diploma (Nagaland) - III Year

विशेष गहन हिंदी शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (दीमापुर) / Special Intensive Hindi Teachers Training Course (Dimapur)


 

 

अखिल भारतीय राजभाषा संगोष्ठी पोर्टब्लेयर

मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिनांक 31 जनवरी और 01 फरवरी, 2019 के दौरान पोर्ट ब्लेयर की धरती पर दो-दिवसीय अखिल भारतीय राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ। संगोष्ठी का प्रायोजन मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत शैक्षणिक संस्था केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा ने किया। मंत्रालय के अंतर्गत संचालित देश भर में स्थित विभिन्न कार्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के राजभाषा अधिकारी, हिन्दी अनुवादक, संस्थाओं के निदेशक तथा वरिष्ठ अधिकारीगण, विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं हिन्दी विद्वानों ने इस संगोष्ठी में सहभागिता की। संगोष्ठी का उद्घाटन 31 जनवरी को टैगोर राजकीय शिक्षा महाविद्यालय, पोर्ट ब्लेयर के टैगोर ऑडीटोरियम में संपन्न हुआ। गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन किया, इसके बाद महाविद्यालय की छात्राओं ने अतिथियों के सम्मान में स्वागत गान एवं एक निकोबारी गीत प्रस्तुत किया।


संगोष्ठी में आए अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार की निदेशक (राजभाषा) श्रीमती सुनीति शर्मा ने कहा कि भारत के वीर क्रांतिकारियों की धरती अण्डमान और निकोबार की राजधानी में राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन अनेक दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। यह देश के सीमांत में समुद्र के बीच स्थित यह सुंदर द्वीप भूमि प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ राजभाषा के कार्यान्वयन की दृष्टि से भी विशिष्ट है। इसलिए यहाँ पर इस संगोष्ठी का आयोजन प्रतिभागियों को राजभाषा के कार्यान्वयन की सकारात्मक प्रेरणा प्रदान करेगा।
इस संगोष्ठी का औपचारिक उद्घाटन श्री प्रकाश जावडेकर, माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार के वीडियो शुभकामना संदेश के साथ किया गया। भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर के निदेशक प्रोफेसर भारत भास्कर एवं टैगोर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. आर.के.तिवारी ने राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार और कार्यान्वयन के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के प्रतिनिधि प्रोफेसर हरिशंकर ने हिन्दी के बहुआयामी संवर्धन के लिए संस्थान द्वारा किए जाने वाले कार्यों का परिचय दिया। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे बाबा साहेब अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रोफेसर नीलमणि प्रसाद वर्मा ने राजभाषा के काम-काज को व्यापक जन-सरोकारों के साथ जोड़ने पर बल दिया और राजभाषा के साथ-साथ हिन्दी की राष्ट्रभाषा के रूप में भूमिका पर भी चर्चा किए जाने की बात कही। अंत में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निदेशक (स्कूल शिक्षा) श्री एम.एस. रवि ने राजभाषा संगोष्ठी के आयोजन एवं इसके उद्देश्यों की सराहना करते हुए सभी गणमान्य अतिथि एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
उद्घाटन के उपरांत तीन अकादमिक सत्रों का आयोजन किया गया। पहले दो सत्रों के विषय थे- ‘सरकार की राजभाषा नीतिः संवैधानिक उपबंध, वार्षिक कार्यक्रम एवं तिमाही रिपोर्ट’ और ‘संसदीय राजभाषा समिति की निरीक्षण प्रश्नावली’। इन विषयों पर श्रीमती सुनीति शर्मा, निदेशक (राजभाषा), मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रस्तुति दी और प्रतिभागियों की समस्याओं एवं शंकाओं का समाधान किया। तीसरा तकनीकी सत्र ‘राजभाषा हिन्दी के कार्यान्वयन में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका’ पर केंद्रित था जिसकी प्रस्तुति केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के सहायक प्रोफेसर श्री अनुपम श्रीवास्तव ने की। इस तकनीकी सत्र की अध्यक्षता एन.आई.आई.टी. के असोसिएट प्रोफेसर डॉ. एन.के. मेहता ने की।
संगोष्ठी के दूसरे दिन तीन अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र का विषय था- सरकारी कार्यालयों में राजभाषा हिन्दी का प्रयोग, जिसपर अण्डमान प्रशासन की पूर्व हिन्दी अधिकारी एवं उप सचिव सुश्री अनस्तासिया ने विचार व्यक्त किए। सत्र की अध्यक्षता डॉ जय नारायण नायक, कुलसचिव नेहू, शिलांग ने की। दूसरे सत्र में ‘वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा प्रकाशित शब्दावली, शब्द-निर्माण, आदि’ विषय पर आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर अवनीश कुमार ने प्रस्तुति दी। इस सत्र के अध्यक्ष प्रोफेसर नीलमणि प्रसाद वर्मा रहे। तीसरा सत्र ‘सुयोग्य लिप्यांतरण से राजभाषा एवं अन्य भाषाओं के मध्य गुणात्मक संबंध स्थापना’ पर केंद्रित था जिसे आई.आई.टी. खड़गपुर के राजभाषा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वी.आर. देसाई ने प्रस्तुत किया।
शैक्षिक सत्रों के बाद कार्यालयों में राजभाषा अधिनियम एवं नियमों का अनुपालनः प्रशासनिक प्रधान/राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष के रूप में दायित्व विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें प्रोफेसर नीलमणि प्रसाद वर्मा, प्रोफेसर अवनीश कुमार, डॉ. के.एल. सरकार (कार्यकारी निदेशक एडसिल, नोएडा), डॉ. संजय कुमार सिंह (संयुक्त निदेशक एन.आई.ओ.एस., नोएडा), प्रेम कुमार चोपड़ा (कुलसचिव आई.आई.टी., गुजरात), बी.एन. चौधरी (कुलसचिव आई.आई.टी., मेघालय) एवं प्रोफेसर जगदेव कुमार शर्मा (लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ, दिल्ली) ने सहभागिता की। परिचर्चा सत्र की अध्यक्षता सुनीति शर्मा, निदेशक (राजभाषा) द्वारा की गई।
सत्रों की कार्यवाही का संचालन श्री अनुपम श्रीवास्तव ने किया। केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के प्रोफेसर हरिशंकर ने संगोष्ठी की कार्यवाही का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
निदेशक (राजभाषा) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।

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