बुधवार, जुल 17

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आप यहाँ हैं:घर संस्थान कार्यक्षेत्र एवं कार्यक्रम (पाठ्यक्रम) नवीकरण एवं संवर्धनात्मक कार्यक्रम

नवीकरण एवं संवर्धनात्मक कार्यक्रम

विभिन्न राज्यों में सेवारत हिंदी शिक्षकों के लिए लघुअवधीय नवीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन नवीकरण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों को भाषाशिक्षण की नवीन प्रविधियों से परिचित कराया जाता है तथा उन्हें मानक हिंदी के प्रयोग के प्रति सतत जागरुक रखने का प्रयास किया जाता है। संस्थान हिंदी शिक्षकों के सतत प्रशिक्षित कार्यक्रम के अंतर्गत कई प्रकार के नवीकरण कार्यक्रम संचालित करता है। प्रतिवेदन सत्र में आयोजित नवीकरण पाठ्यक्रमों का विवरण निम्न प्रकार है-

उच्च नवीकरण पाठ्यक्रम (अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान)

इस प्रकार के पाठ्यक्रमों के अंतर्गत विश्वविद्यालय स्तर पर हिंदी की अध्ययन-अध्यापन संबंधी समस्याओं पर विचार किया जाता है और विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रमों को आवश्यकतानुसार अधिक भाषानिष्ठ बनाने के लिए भाषावैज्ञानिक, शैलीवैज्ञानिक, कोशवैज्ञानिक आदि अनुप्रयोगपरक संदृष्टियों को विकसित करने का प्रयास किया जाता है। प्रतिवेदन सत्र में इस प्रकार का कोई पाठ्यक्रम मानव संसाधन की कमी के कारण नहीं किया जा सकता है।

भाषा संचेतना विकास कार्यक्रम

इस प्रकार पाठ्यक्रम उन हिंदी शिक्षकों एवं प्रशिक्षणार्थियों के लिए आयोजित किये जाते हैं जो हिंदी पढते तो हैं किंतु हिंदी की राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय एवं राजभाषायी भूमिकाओं से परिचित नहीं होते। ऐसे शिविरों के माध्म से उनको हिंदी भाषा के विविध स्वरूपों से परिचित कराया जाता है और इसके महत्व एवं प्रयोग के प्रति संचेतना विकसित की जाती है।

संवर्धनात्मक पाठ्यक्रम

संस्थान द्वारा संचालित शैक्षिक गतिविधियों से संबद्ध संस्थानों एवं प्रशिक्षण महाविद्यालयों में पाठ्यक्रम एवं परीक्षा संबंधी एकरूपता तो होती है किंतु वास्तविक शिक्षण संबंधी एकरूपता नहीं होती है। इस समस्या के निराकरण हेतु प्रशिक्षणार्थियों को हिंदी के स्वाभाविक परिवेश से परिचित कराने के लिए प्रसार सेवा एवं नवीकरण एकक द्वारा संवर्धनात्मक पाठ्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे पाठ्यक्रमों की अवधि 2 या 3 सप्ताह की होती है। इनमें पाठ्यक्रम से संबंधित विषयों पर व्याख्यान कराए जाते हैं तथा प्रशिक्षणार्थियों की अध्ययन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाता है।