गुरुवार, जून 20

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जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग की राष्ट्रीय संगोष्ठी

 ‘इंटरनेट और आज का मास मीडिया’

(दिनांक 16-17 मार्च, 2016)

केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के तत्वावधान में ‘इंटरनेट और आज का मास मीडिया’ विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी एवं पर्यावरण पर चित्र-प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में हिमाचल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप अग्निहोत्री ने मीडिया में निहित स्वार्थों की बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जाहिर की। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री राहुल देव ने सोशल मीडिया को मीडिया के समावेशीकरण एवं लोकतंत्रीकरण के रूप में देखने के साथ-साथ तकनीक के दुरुपयोग के बारे में भी आगाह किया। द्वितीय सत्र में डॉ. देवेंद्र शुक्ल एवं वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल एवं राजशंकर शर्मा ने भी पर्यावरण के संदर्भ में जनसंचार माध्यमों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। इस सत्र में संस्थान के प्रशिक्षु पत्रकारों ने भी प्रतिभाग किया। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में संस्थान के निदेशक प्रो. नंद किशोर पाण्डेय ने तकनीक माध्यमों को हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं से जोड़ने पर जोर दिया। कार्यक्रम में प्रो. सुन्दर लाल, प्रो. गिरजा शंकर शर्मा, डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ, प्रो. हरिशंकर, प्रो. वीना शर्मा, प्रो. देवेन्द्र शुक्ल, कुलसचिव डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी सहित संस्थान के विभिन्न प्राध्यापक ओर छात्र-छात्राएं सम्मलित थे, कार्यक्रम के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष श्री केशरी नंदन ने सभी को धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का संचालन श्री अनुपम श्रीवास्तव द्वारा किया गया।


लाइक....कमेंट...शेयर...सोशल... मीडिया एक बड़ा मायाजाल बन गया है, और नई पीढ़ी इसकी गिरफ्त में है,- यह उद्गार वरिष्ठ पत्रकार एन.आर.स्मिथ ने केंद्रीय हिंदी संस्थान में मीडिया विषयक सेमीनार में व्यक्त किए।
सोशल मीडिया विशेषज्ञ राकेश उपाध्याय ने डिजिटल व्यस्तता के चलते समाज से कटाव पर चिंता जाहिर कि सोशल मीडिया आम आदमी के लिए हथियार बन गया है व इंटरनेट आम आदमी की ताकत बन गया है। उन्होंने बताया कि आम आदमी सोशल मीडिया का उपयोग कर सोशल जर्नलिस्ट की भूमिका निभा रहा है। एन.आर.स्मिथ के अतिरिक्त ‘आई.बी.एन. खबर’ के वरिष्ठ पत्रकार दीपक पालीवाल ने इस बात को दोहराया कि अखबारों के समाचारों की गुणवक्ता एवं विश्वसनीयता इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं साइबर मीडिया से कहीं अधिक बनी हुई है, भले ही यह दौर ब्रेंकिंग न्यूज का माना जा रहा हो। भरत मल्होत्रा ने साइबर मीडिया एवं सोशल मीडिया के तकनीकी पक्षों पर प्रकाश डालते हुए क्षेत्रीय भाषाओं एवं हिंदी पत्रकारिता में उपलब्ध अवसरों के बारे में बताया। ब्लॉगर प्रतीक पांडेय ने भारत में ब्लॉगिंग के विकास और युवाओं में इसकी लोकप्रियता के बारे में अपने अनुभव साइना किए। उन्होंने मध्यपूर्व की जैस्मिन क्रांति में सोशल मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला। न्यूज पोर्टल समाचार4मीडिया के सहायक संपादक अभिषेक मल्होत्रा ने कहा कि सोशल मीडिया आजकल ‘ट्रेंड सेटर’ की भूमिका में आ गया है।
वरिष्ठ पत्रकार ऋषि माथुर ने प्रशिक्षण की कमी पर चिंता जाहिर करते हुए समाचारों को पाठकों के जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि संवाददाता आजकल घटना स्थल पर कम पहुँच पा रहे हैं और सोशल मीडिया समाचारों के स्रोत के रूप में भी कार्य कर रहा है। पीयूष पांडेय ने कहा कि सोशल मीडिया ने लोगों को एक मंच प्रदान किया है लेकिन जवाबदेही तय न होने के कारण इसके अपने खतरे हैं इस कारण अफवाहें फैलती हैं और हाल में हुए साम्प्रदायिक दंगे इस के प्रमाण है।
अंतिम सत्र में डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ एवं ऋषि माथुर ने संस्थान के प्रशिक्षु पत्रकारों की जिज्ञासाओं का समाधान ने करते हुए उन्हें पत्रकारिता के गुर बताये। संचालन वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल ने किया। संस्थान के वरिष्ठ आचार्य प्रो. देवेंद्र शुक्ल तथा डॉ. राजशंकर शर्मा ने प्रशिक्षुओं का मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्द्धन किया।
विभागाध्यक्ष तथा संगोष्ठी के संयोजक श्री केशरी नंदन ने दो दिसवीय संगोष्ठी का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा श्री अनुपम श्रीवास्तव ने कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु धन्यवाद ज्ञापन किया।